मैं और मेरी पंचायत. चाहे ऑफिस हो, या हो घर हम पंचायत होते हर जगह देख सकते हैं. आइये आप भी इस पंचायत में शामिल होइए. जिदगी की यही छोटी-मोटी पंचायतें ही याद रह जाती हैं - वरना इस जिंदगी में और क्या रखा है. "ये फुर्सत एक रुकी हुई ठहरी हुई चीज़ नहीं है, एक हरकत है एक जुम्बिश है - गुलजार"

Friday, October 31, 2008

एक कुत्ता मेरी बाइक के समाने फिदायीन हमला कर बैठा

Stray DogImage by Image Search via Google

'दिन वैसे ही ख़राब चल रहा था, उसी में एक कुत्ता मेरी बाइक के समाने फिदायीन हमला कर बैठा, लेकिन मुझे मामूली सी खरोंच आई... चिंता की कोई बात नहीं है.'

ये लो कर लो बात, आख़िर चिंता की कोई बात क्यों नहीं है - उस कुत्ते के बारे में तो कुछ बताया ही नहीं मेरे दोस्त ने जिन्होंने अपनी मेल में हमको इस घटना की जानकारी दी थी. हाँ वैसे हमारे देश में कुत्ते हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग हो गए हैं. बड़ा ही चिंतनशील जीव है कुत्ता. अगर वो कुत्ता पालतू हो तो कह नहीं सकते, उसके तो छततीस पैंतरे होते हैं जी. मैं तो अपने गली और सड़क के कुत्तों की बात कर रहा हूँ.

और अगर आपको हमारे देश के आवारा कुत्तों की काबिलियत पे शक है, तो दोबारा सोचिये. या रहने दीजिये शायद आप समझ नहीं पायेंगे. वो जूनून जो उनके भीतर है, अगर आपने कभी देखा नहीं है तो मैं आपको बताता हूँ. वो उनका सड़क के किनारे दूर से आते किसी स्कूटर का इन्तेजार करना और फिर एकदम सही टाइमिंग सेट कर के एकदम एंगल बना के, रफ़्तार में आ रहे स्कूटर के दोनों पहियों के बीच से सुरक्षित पार कर होते हुए निकल जाना आसान नहीं है गुरु. वाकई कुत्ता बड़ा daring जीव है.

विदेशों में साला कुत्तों को आदमी बना के पालते हैं. मेरे को बताया गया कि वहाँ कभी किसी कुत्ते को नाम ले के मत बुलाना. मैंने कहा - क्या? तो बताया गया कि कुत्ता मत कहना उधर.. लोग लोड ले लेते हैं. मैं जब किसी काम से एक सज्जन के घर गया उधर तो वो अपने कुत्ते के बारे में इतने इमोशनल थे , कि मैं जितनी देर था , बार बार मन में दोहरा रहा था.. कि कहीं गलती से कुत्ता न बोल दूँ.

अब आइये मैं आपको बताता हूँ कि कुत्ते कितने शालीन होते हैं. बस गली हो या पड़ोसी का बालू हो, बस पड़े रहते हैं, कभी मन किया तो भूंक लिए.... दिल तो इनका इतना बड़ा होता है, कि बस कभी हड्डी भी पड़ी है तो हाथ (मेरा मतलब है मुंह ) भी नहीं लगायेंगे. लालची नहीं होते साब, हमारे यहाँ के कुत्ते.. दिन भर किसी भी गली में निकल जाएँ भगवान् की इतनी दया है कि हर गली में इतना खाने को मिल जाता है, कि वो किसी एक घर के मोहताज नहीं होते हैं.

कुछ कुत्ते बहुत इज्जतदार होते हैं, साला बगल के गली के आवारा कुत्ते अगर उनके इलाके की कुतिया पे ग़लत नजर डाले तो बस जान पे खेल जाते हैं. इतना भून्केंगे .. इतना भूकेंगे .. कि पूरा मोहल्ला जाग जाए.. हां जी, यहाँ तक तो ठीक. पर आप पूछेंगे कि वो हर गली का कुत्ता पालतू कुत्ते को देख के क्यों भूंकता है.. ऐसे भून्केंगे मानो आसमान सर पे उठा लेते हैं.... अब सारा सवाल हमसे क्यों पूछ रहे हैं आप... आपको मेरे इंसान होने पे शक है क्या???



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5 comments:

  1. सावधानी बर्तीएगा. कुत्ते कहीं नाराज़ न हो जावें. आभार.

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  2. कुछ कुत्ते बहुत इज्जतदार होते हैं, साला बगल के गली के आवारा कुत्ते अगर उनके इलाके की कुतिया पे ग़लत नजर डाले तो बस जान पे खेल जाते हैं. इतना भून्केंगे .. इतना भूकेंगे .. कि पूरा मोहल्ला जाग जाए.. .....

    दूर द्रष्टि है साहब आपकी......आज सुबह हमारे गाड़ी में बैठे बैठे एक ने हमारे टायर पर टांग उठा दी...हम शू शू करते रह गये

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  3. बहुत खूब बहुत खूब जनाब

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  4. मैं तो अक्सर यही सोच-सोच कर अभिभूत होता रहता हूँ..आदमी के साथ-साथ रहने वाले कुत्ते भी आज तक कुत्ते ही हैं ...आदमी नहीं हुए....गनीमत है कि नहीं हुए ......अगर कुत्ते भी आदमी हो जाते तो धरती का क्या होता........................!!!

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  5. बेहतरीन!!मस्त पोस्ट है!

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विचारों को पढने और वक्त निकाल के यहाँ कमेन्ट छोड़ने के लिए आपका शुक्रिया

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