मैं और मेरी पंचायत. चाहे ऑफिस हो, या हो घर हम पंचायत होते हर जगह देख सकते हैं. आइये आप भी इस पंचायत में शामिल होइए. जिदगी की यही छोटी-मोटी पंचायतें ही याद रह जाती हैं - वरना इस जिंदगी में और क्या रखा है. "ये फुर्सत एक रुकी हुई ठहरी हुई चीज़ नहीं है, एक हरकत है एक जुम्बिश है - गुलजार"

Sunday, October 11, 2009

सब कुछ हो गया - पर ये एक है कि अभी तक पकडा नहीं गया

The SamuraiImage via Wikipedia
ससुरे तालिबान बड़े जालिम लडाके हैं - बड़ी खतरनाक लड़ाई लड़ते हैं. अब अफगानिस्तान हो या पाकिस्तान का पेशावर - गजब जोखिम भरी लड़ाई लड़ रहे हैं. अब इनका खौफ कितना है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है - गत दिनों,  न्यूज़ आती है, कि काश्मीर में कुछ तालिबान लडाके घुस आये हैं - भारत सरकार की मिलिट्री के आकाओं को इसका खंडन करना पड़ता है,  कि नहीं ऐसा नहीं है. आतंकियों का मनोबल बढाने के लिए ये काफी था.

जब मैं इन तालिबान लडाकों को देखता हूँ, तो उनका ये गजब का जूनून मेरे को कुछ पुराने सिनेमा की याद दिलाता है. इनमें से आज के जमाने के कुछ सिनेमा हैं - The Last Samurai, Gladiator, troy  वगैरह वगैरह.. ये सारी सिनेमा में एक लडाका होता है, जो गजब का बहादुर होता है - बहुत लोगों को अकेले मौत के घाट उतार देता है. मैं सोच रहा था, कि शायद इन्हीं सब सिनेमा को देख के वो लोग इतने दिलेर बने हैं. वरना ज़रा सोचिये... पाकिस्तान के सेना के एक ब्रिगेडिअर और एक लेफ्टिनेंट कर्नल सहित कई सैनिको को उन्हीं की मांद में घुस के मार डालना और कुछ को बंधक बना लेना - जंगली आदिवासी टाइप के लडाकों की बस की बात नहीं थी.

अब पता नहीं किसकी गलती है, हो सकता है कि इसी तरह के कुछ सिनेमा शुरुवाती दौर में अमेरिकियों ने हालीवुड से ले आके तालिबानी ट्रेनिंग के वक़्त उनको दिखाया होगा (डिस्क्लैमेर - लोग कहते हैं कि तालिबान लोगों को बनाने में अंकल सैम का सहयोग हुआ करता था. मैं बहुत छोटा था उस वक़्त, कुछ बुजुर्ग जो इसे पढ़ रहे हैं, कृपया प्रकाश डालें. )

तो मैं ये सोच रहा हूँ, कि आखिर ससुर के नाती ये तालिबान कौन सी चक्की का आटा खाते हैं. या ऐसे पूछता हूँ, कि उधर पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा वाली घाटी में कौन सी फसल उगती है, कि लड़ने की इतनी ताक़त देती हैं. क्या मोटिवेशन है बाबा. वाह! वैज्ञानिकों को वहाँ की मिटटी की शोध करनी चाहिए.

अगर कारपोरेट जगत चाहे तो अपने executives को मैनेजमेंट ट्रेनिंग के लिए स्वाट घाटी भेज दे. जोखिम है - पर फायदा भी बहुत है. आखिर अर्सों से बस लड़े जा रहे हैं. पता नहीं क्या चाहते हैं. पर बस लगे हैं तो लगे हैं.. अगर लड़ाई बंद हो जाए तो ये लोग बैठे - बैठे यूं ही मर जायेंगे.. तो आखिर कुछ तो है. कुछ टी.वी. के प्रचार वाले भी इनसे अपने अगले प्रचार का आईडिया ले सकते हैं. जैसे - वगैरह - वगैरह खाइए - लगाइए - इस्तेमाल करिए और तालिबान जैसी प्रबल इच्छा-शक्ति और लगन और ताकत पाइए.

वैसे कुछ लोग हैं, जो इस महान लड़ाई के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं. मेरे भाई ने पुछा .. ये तालिबान लोग कौन है? अल-कायदा और तालिबान अलग - अलग हैं क्या? उसको ये जान के हैरानी हुई कि कई देश की सेना (NATO) मिल के वहाँ लड़ाई लड़ रही है, पर फिर भी वहाँ मामला हल नहीं हो रहा है. वैसे मेरी माता जी, जो कि आस्था चैनल के बाबा लोगों के अलावा अगर कोई दूसरा चेहरा पहचानती होंगी तो वो है.. ओसामा बिन लादेन का. ससुरा इतनी बार टी.वी वाले उसका चेहरा दिखाते हैं कि कहो मत. कहने लगीं .."सब कुछ हो गया - पर ये एक है कि अभी तक पकडा नहीं गया"

(अगर किसी देश की खुफिया एजेन्सी - इस को पढ़ रही है, तो कृपया गलत मतलब न निकालें - हमारा उन लोगों से कोई लेना देना नहीं है.. हम तो बस यूं ही टाइम पास कर रहे हैं...)

Monday, October 5, 2009

अच्छा ही है, कि श्रीलंका और पाकिस्तान में आपस में दुश्मनी नहीं है

Exocet missile in flight
आपको लगता होगा कि भारत को चीन से खतरा है, पाकिस्तान से खतरा है. पर मैं आपको आज एक अन्दर की बात बताता हूँ. किस्सा कुछ इस तरह है. कुछ दिनों पहले आपको याद होगा कि पाकिस्तान में श्रीलंका क्रिकेट खिलाडियों पे हमला हुआ था, और श्रीलंका के खिलाडी किसी तरह से बच गए थे. अंतरराष्ट्रीय महकमें में काफी हलचल मची थी. भारत में मीडिया ने इस घटना को बहुत ज्यादा हवा नहीं दी थी. पर असल में मामला काफी खराब हो गया था.


उधर श्रीलंका में खुफिया जानकारी के आधार पे पाकिस्तान को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था.

अच्छा ही है, कि श्रीलंका और पाकिस्तान में आपस में दुश्मनी नहीं है - और मामला वहीँ रफा दफा हो गया. फ़र्ज़ कीजिये श्रीलंका आक्रमण की तैयारी करता, तो क्या होता? अजी भाई जी, कुछ इस तरह हो गया होता..

श्रीलंका ने अपनी वो सारी मिसाइल निकाल ली जो कि लिट्टे से लड़ाई के बाद बची थी. अब लफडा ये था कि कोई भी मिसाइल की रेंज इतनी नहीं कि वो भारत को लांघते हुए पकिस्तान पे जा के गिरे. बड़ी भारी समस्या. भारत भी परेशान हो उठा. आप पूछेंगे - भारत का क्या जाता है - जिसको लड़ना है वो लड़े. अरे नहीं कक्का यहीं तुम धोखा खा गए. जरा सोचो - अगर श्रीलंका ने मिसाइल छोडी, तो वो तो भारत के ऊपर ही फुस्सी होगी न. तो भारत ने बीच-बचाव करना शुरू किया. सुरक्षा सलाहाकार समिति की बैठक में ये भी सलाह दिया गया की भारत देश को श्रीलंका की सहायता करनी चाहिए. वहीँ साउथ इंडिया के शांतिप्रिय प्रदेश घबरा गए. वरना अभी तक तो वो ये सोचते थे कि पाकिस्तान जितना भी हवा भर ले, इधर तक तो नहीं आयेगी उसकी मिसाइल. पर अब क्या होगा. न्यूज़ चैनल वालों ने चर्चा छेड़ दी - कि कर्नाटक, केरला, तमिलनाडु, सबसे सेफ कौन है. बस एक बार श्रीलंका की मिसाइल उनके प्रदेश के ऊपर से निकल जाए.

कुछ लोगों ने सलाह दी, कि भारत को कम से कम किराए पे अपना राकेट श्रीलंका को देना होगा. कि बम तो श्रीलंका का हो, पर किसी तरह से वो बम सुरक्षित तरीके से पकिस्तान में गिरे. पर लफडा ये कि, अंतर्राष्ट्रीय तबका इसकी मंजूरी देगा कि नहीं. आखिर कोई कानून तो ऐसा बनाना ही चाहिए कि अगर कोई देश दूर तक जाके लड़ना चाहता है, पर उसकी बम फेंकन ताकत उतनी नहीं है, तो दूसरे देश उसे कुछ राकेट किराए पे दे सकें. इसे मिसाइल हस्तांतरण के अर्न्तगत कतई ही नहीं देखा जाना चाहिए. आखिर एक देश को अपनी सेफ्टी वास्ते इतना तो करने ही देना चाहिए.

इन सबके बावजूद ... अगर पाकिस्तान और श्रीलंका के मिसाइल आपस में टकरायेंगे तो आखिर भारत के ही किसी शहर पे गिरेंगे. हे भगवान्.. भारत पूरी तरह से असुरक्षित. .. अगर पानी की लड़ाई हुई, तो श्रीलंका के जहाज इतने बड़े नहीं थे कि एक बार तेल भर के बिना भारत कि सीमा में प्रवेश किये बगैर पाकिस्तान से गोली बारी करें.

तो कुल ले दे के भारत के समझाने और भविष्य में मदद के आश्वासन देने के बाद और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ.

Sunday, October 4, 2009

पहिये के बाद, दूसरा सबसे बड़ा आविष्कार..ईमेल

Settings: Setting Up Email AccountsImage by pouwerkerk via Flickr

पहिये के बाद, दूसरा सबसे बड़ा आविष्कार..ईमेल

जी ये न्यूयार्क टाईम्स की रिपोर्ट या फिर किसी नोबेल प्राइज़ विजेता की किताब के पन्नों से लिया गया वक्तव्य नहीं है.. ये पूर्णतया देशी पंचायतनामा की पेशकश है... जब हम पढ़ाई करते थे, तो एक बार माट्साब ने एक सवाल पूछा - कि बताओ, अभी तक की सबसे बड़ी खोज क्या है... बहुतों ने जबाब दिया.. हमने माट्साब के जबाब का इन्तेजार किया .. उन्होंने कहा.. 'पहिया'. तब तो मैं जबाब नहीं दे पाया था.. पर अभी मैं पूरी तरह से तैयार हूँ. कि अगर पहिया के बाद का कोई दूसरा सबसे बड़ा आविष्कार है, तो वो है ईमेल.

ईमेल एक ऍप्लिकेशन नहीं है, बल्कि, एक नशा है. हमें याद है - १९९९ में मैंने अपना पहला ईमेल आईडी बनाने का प्रयास किया था. कंप्यूटर की पढ़ाई थी और उसी की लैब क्लास थी. हमें अभी भी याद है, कि जब क्लास में सर ने पहली बार ईमेल क्या है और कैसे काम करता है, के बारे में बताया था.. तो जान कर बड़ी हैरानी हुई थी. फिर उन्होंने बड़ी ही अदा से अपने पर्स में से अपना विजिटिंग कार्ड निकाला और दिखाया कि उनका एक ईमेल आई-डी है. हम आगे बैठते थे और उन चंद खुशनसीबों में थे, जिन्होंने पहली बार कोई ईमेल आई-डी देखा था.


फिर लैब की क्लास में ऐसा मजमा लगा कि लोग पिल पड़े. http://www.yahoo.com/ जी हाँ, आज भी याद है, पूरा क्लास अगले ३ लैब क्लास्सेस में अपना ईमेल आई-डी बनाने में जुटा रहा. क्या लगन थी - हमारा भी पहला ईमेल-आई-डी तीन दिन के अथक प्रयास के बाद बना. कारण ये कि, १९९९ में एक तो स्लो इन्टरनेट कनेक्शन और उसमें पूरा क्लास एक ही वेबसाइट के पीछे पड़ा था.. भाई.. माट्साब ने कोई दूसरी वेबसाइट बताई ही नहीं, तो लोग खोलते कैसे.

थोड़े दिनों, के बाद जब थोड़ी और समझ आई, तो पहला सवाल मैंने ये पूछा (याद नहीं है कि किससे पूछा था ) कि भाई ये मेल में CC और BCC क्यो होता है. जबाब आया, कि अगर किसी का ईमेल आई-डी CC/BCC में रखेंगे तो वही मेल सारे लोगों को चली जायेगी. उस वक्त के मेरे ज्ञान के हिसाब से मेरे को ये बात बहुत ही अटपटी लगी.. कि ये क्या समझदारी की बात हुई, भला हम एक ही बात पहले तो कई लोगों से क्यों कहेंगे.. और अगर कहेंगे तो फिर TO में ही रख के भी तो कह सकते हैं, ये एक्स्ट्रा पंचायत करने की क्या जरूरत है. बहुत दिनों तक इसकी महिमा का पता नहीं चला.

फिर १ वर्ष की पढ़ाई के लिए बंगलोर आना हुआ.. वहां लोगों ने लैब में लाइनक्स (LINUX) रखा था. तो ईमेल की एक रेडीमेड सुविधा थी - नाम था उसका 'पाइन' (PINE). ये टेक्स्ट आधारित ईमेल प्रोग्राम था. क्या सुपर स्पीड थी.. वहीँ से नशा लगा ईमेल का तो अभी आज तक नहीं छूटा है. ईमेल - आई-डी (d0253102@ncb.ernet.in) बड़ी ही चिरकुट थी. पर क्या बला की स्पीड थी. लोग दो लाइन प्रोग्राम लिखते तो ४ बार बीच में मेल खोलते थे. शुरुवाती तीन महीने मानो काले पानी की सजा माफिक सिर्फ़ कीबोर्ड और काली स्क्रीन. न तो माउस दिया गया और न ही विन्डोज़..जब चौथे महीने विन्डोज़ के दर्शन हुए तो लगा कि स्वर्ग में आ गए हैं. पर फिर भी ईमेल का ये मजेदार दौर पूरे एक वर्ष चला. फिर वहीँ से नौकरी लग गई.. फिर ईमेल का सबसे रोचक दौर चालू हुआ.

अब ऑफिस की एक हमारे नाम की ख़ुद की ईमेल आई-डी थी. क्या सही लगा देख के. पहली बार मेरा फर्स्ट और लास्ट नेम पूरा लिखा था ईमेल आईडी में. जितनी बार देखो मन नहीं भरता था. आपको आश्चर्य हो रहा है. अरे कभी आपने मेरा दर्द देखा होता, तो न जानते.. जब मैंने अपने पहली ईमेल - आई-डी बनाई थी, तो तीन दिन के अथक प्रयास के बाद जो निकल के आई, कि उसमें 'नीरज' - की जगह मैंने 'नीरा_सिंग' से काम चलाया था. कितना दर्द होता था.. जब मैं नीरज से नीरा बना था.. तो मैं कह रहा था, कि बड़ा मुश्किल था कोई ऐसा ईमेल होना जिसमें आपका पूरा नाम आराम से आ जाए.. तो बड़ा सम्मान महसूस हुआ.. शायद उतना ही.. जितना हमारे माट्साब को किसी ज़माने में हुआ होगा, जब उन्होंने सारी क्लास के सामने अपना ईमेल आई-डी अंकित विजिटिंग कार्ड लहराया था..

जैसे जैसे दौर आगे बढ़ा.. लोगों का ईमेल का जूनून बढ़ता गया.. अब धीरे - धीरे मुझे CC/BCC का मतलब समझ में आने लगा. बाकी कुछ तो ऐसा समझ में आया, कि अगर CC/BCC न होता तो ऑफिस में लोग मेल कैसे करते. ऑफिस में बड़ा महत्व है कि आप किसको सीसी में रख के मेल करते हैं, उसी के हिसाब से मेल की वेलू घटती - बढ़ती रहती है. जैसे अगर आपने सीसी में बड़े ओहदे के साहब का ईमेल आई-डी दाल दिया तो मायने बदल जाया करते हैं. हमारे कितने बड़े बड़े ओहदे पे बैठे हुए लोग हैं, जो कि दिन भाई बस मेल के जरिये ही संवाद करते हैं और वही उनका सारा काम चलाता है.. ईमेल चला गया, तो वो बाकी अपनी जीविका कैसे चलाएंगे.. फिर ईमेल के अपने बहुत से फायदे हैं, वो आपको पता हैं.

बहुत जल्दी ही ईमेल ने हमारी दिनचर्या में एक अहम् जगह बना ली है. 

वो पुरानी 'सरिता' की कहानी का एक पन्ना

I've got a Monkey on my back.....Image by law_keven via Flickr
जय बजरंग बली ...और सब खतरे टल गए ...बजरंग बली पे याद आया एक मस्त किस्सा हुआ पिछले दिनों राज -राजेश्वरी नगर, बनारस में ...मेरे आगे वाले नए किरायेदार ने दरवाजा खुला छोड़ दिया तो एक बन्दर शाम को पहले किचेन में घुस गया तो जो लेडी है उन्होंने बच्चों को बेडरूम में बंद कर दिया और वेट करने लगी कि बन्दर बाहर निकल जाये.

थोडी देर में 20-25 बन्दर घर में घुस गए और उन्होंने भयानक उत्पात मचाया ...तोड़फोड़ की किचेन में ...

1 घंटे चला ये खेल ..किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि क्या करें ..कोई जेंट्स नहीं था - मम्मी ऊपर घर में और किरायेदार कमरे में बंद ...फिर लल्लन भैया के साले  साहेब जो सामने वाले आशु के मकान में रहते है उन्होंने हिम्मत की. डंडा लेकर घुमाया और घर में आकर सारे बंदरो को भगाया ....सच बहुत हिम्मत वाला काम था ...फिर बन्दर खीज कर, मम्मी ऊपर से झांक रही थी तो उन्हें काटने दौड़ा ..तो मम्मी किसी तरह दौड़ के बची ..इस तरह राज राजेश्वरी नगर में बंदरो का आतंक बढ़ता रहा.

बात ऐसे बनी - बच्चो के मुख से - दिन दहाड़े - वो पुरानी सरिता की कहानी का एक पन्ना -  (आभार - बंटी )

Saturday, October 3, 2009

रोचक वार्तालाप - कुछ कड़ियाँ आपके लिए - कुछ मिठास हो जाए

Open Box: Poetry Anthology by Neighbourhood Di...


करीब एक वर्ष पूर्व काम के सिलसिले में प्रथम बार देश के बाहर जाना हुआ था. उन दिनों कुछ बेहद ही रोचक बाते हुई थीं हमारे और हमारे तथाकथित शुभचिंतकों के बीच में. बस उन्ही में से कुछ हीरे आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ. कुछ मिठास हो जाए.

[1] जब मैं यहाँ बोस्टन पहुँचा तब मेरे साथ ऐसे सहानुभूति जतायी गई

कि वहाँ तुम्हारे पास रूम तो है पर रूम पार्टनर नहीं है ..,कार तो है पर ड्राईवर नहीं है ...,पड़ोस में रूम और घर हैं पर अपने वतन का कोई नहीं है ..........किचेन तो है पर कुक नहीं है ...... : -)

खैर इसका भी मज़ा लो ....हमे तुम्हारी प्रतिभा पे पूरा भरोसा है ....जल्दी ही तुम गोरों के साथ भी BC (खूब बकर - बकर करने को उधर की तरफ बकरचोदी - BC करना कहा जाता है.. कृपया इसे गाली न समझें) करने कि कम्युनिटी बना लोगे ...

वैसे जल्दी से जल्दी ड्राइविंग वाला काम और रास्ता बताने वाली मशीन (G.P.S) का function समझ लो ....साथ वाले लडके के इंडिया वापस आने से पहले .. फिर तो बस मौज होगी ....और तुम वहाँ की मस्त रोड पे कार चला के song गाना ..( क्यों ...चलती है पवन ....क्यों मचलता है मन ....न तुम जानो न हम ...) हा ......हा ......हा ......

[2] एक बार जब बहुत दिनों से दोस्तों के मेल नहीं आ रहे थे तब

और माहौल ठीक है इधर. मैं ही बस अपडेट देता रहता हूँ और बाकी जबाब में आप सब लोग मेरे को सलाह देते हैं और उस पर विद्वान - टिप्पणी करते हैं..

आख़िर मेरा नम्बर कब आएगा.. जब मैं दूसरे को सलाह दूँ.. और वो तब आएगा जब आप लोग मेल करेंगे और अपने बारे में पंचाईत सुनायेंगे ... अब ऐसा तो हो नहीं सकता कि लाइफ में कुछ हो ही न रहा हो .... बस नोटिस करना चाहिए... बिना किसी कारण के कोई घटना घटित नहीं होती है ... लाइफ को बड़े perspective में देखना चाहिए. रोज रोज की च्हिल पों से परेशान नहीं होना चाहिए

बस अब मैं नहीं चाहता कि कोई टिप्पणी हो इसके ऊपर (ये मेरा अनमोल ज्ञान है )... बजाय इसके थोड़ा वक्त लीजिये और मेल करिए :)

3) मेरी तबियत का ख्याल रखते हुए एक सलाह

बाबा, ये चिंता का विषय है. आप ठण्ड के प्रति सेंसिटिव हैं. हम आपको बीमार होते हुए नहीं देख सकते विदेश में. कडुआ तेल कि बोतल अगर ले जाना भूल गए हो तो तुंरत वहां से ले लीजियेगा. साले सब ओलिव आयल use करते हैं. आप वाला तेलवा सस्ते में मिल जायेगा हमको लगता है. अपना ख्याल रखिये बाबा. कम्बल गमछा सब लपेट कर रहा करिए.

4) मेरे को मेरी ताक़त का एहसास कराती हुई एक दहकती मेल

*बड़ी पियरी वाले बाबा
**बनारस वाले बाबा
***बंगलुरु वाले बाबा
****बोस्टन वाले बाबा

ये चमतकारी और अपरं अलंकारी बाबा की कहानी है विदेशी पानी से भी बाबा को कुछ फरक नहीं होता जो एक अलग मति के इंसान हैं

एक बाबा भक्त बम्बई से

*बड़ी पियरी (बनारस का मोहल्ला जहाँ मेरा शुरुवाती बचपन बीता है )
**बनारस (हिंदुस्तान में एक शहर जहाँ का मैं हूँ)
***बंगलुरु जहाँ मैंने १ साल पढ़ाई की और करीब ३ साल से आजिव्कोपर्जन कर रहा हूँ.
****बोस्टन - अमेरिका का एक शहर जहाँ मेरे को ऑफिस के काम से कुछ वक्त के लिए आना पड़ा.

5)जब एक पुराने मित्र को पता चला मेरी इस यात्रा के बारे में - एक बधाई संदेश ऐसे आया

बधाई हो भाई,आख़िर बरसों की तपस्या रंग लायी .Now do one thing,don't act like uncle in that dream land. Do all the activities wat a youngster does. hope your .............

6) एक विचार और मेरे को उत्साहित करने के लिए

बाबा बाबा बाबा आपने चमत्कार कर रखा है. पूरी टीम को अकेले टक्कर दे रहे हैं बाबा.
नए मुल्क में कुछ नया करने का .
जय भारत,

7) जब दोस्त को गुस्सा आता है तो वो क्या लिखते हैं - मैं बेक़सूर हूँ.

साला बाबा की तो.....दुनिया बदल गई, कहाँ से कहाँ पहुँच गई, साला ख़ुद बाबा बड़ी पियरी से बोस्टन पहुँच गए.साला अभी भी नाटक है. पकड़ के दो लगाये सुबह रोज नास्ते में, सारी चर्बी उतर जायेगी साला बाबा की ऐसी की तैसी हल्ला बोल.

8) मेरे ब्लॉग के बारे में प्यार भरे दो शब्द

कैसा लग रहा है वहां? आपका ब्लॉग पढ़ के तो समझ लीजिये कि हम भी USA में ही विचरण कर रहे हैं.

कवि कालिदास भी इतना बेहतरीन नहीं लिख पाते.

जुग जुग जियो मेरे लाल.

9) कुछ लोग मेरी काबिलियत पे भरोसा नहीं करते -- ऐसे ही एक सज्जन मेल में लिखते हैं

Coooool!!!
Enjoy your stay and behave yourself :D (खूब मजे करो - पर अपनी हद मत भूलना )

मैंने जबाब दिया...

Yep… that’s a very useful piece of advice…. (जी हाँ, ये बहुत ही अहम् सलाह है...)

जबाब आता है ...

Hahaha…As long as you ensure you don’t show up on any news channel, I will assume you are behaving yourself :) (जब तक कि तुम ये भरोसा दिलाते हो, कि तुम वहां के किसी न्यूज़ चैनल पे नहीं दिखाए जाते हो, तो मैं मान लूँगा कि तुम वहां अपनी हद में ही हो...)

10) कुछ लोग ये कहते हैं

ग्राहक को थोड़ी हिन्दी सिखा देना. :D:D

तो मैंने कहा - ये ग्राहक बड़ा ही तकनीकी ज्ञान वाला है, पहले तो मैं उनकी ये तकनीकी भाषा समझने कि कोशिश कर रहा हूँ. इसके पहले कि मैं उन्हें हिंदी सिखाने के बारे में सोचूँ

जबाब आता है....

हां हा सही है..!!! तो कम से कम उनको राजा राजेश्वरी नगर (बंगलोर) के बारे में ही बता दो... उनको कह देना कि जब भी वे बंगलोर आयें, तो राजा राजेश्वरी नगर जरूर भ्रमण करें. (मैं राजराजेश्वरी नगर, बंगलोर में ही रहता हूँ, और लोगों को हमेशा ही वहां की खासियत के बारे में इस हद तक प्रेरित करता हूँ, कि लोग खिसिया जाते हैं.. महोदय की ये उपरोक्त सलाह उसी पे एक चुटकी है..)

11) एक पुराने मित्र ने ऐसे अपनी शुभकामनाएं दीं

हे चंगू बाबा उर्फ़ नीरज भाई उर्फ़ मुखिया जी !!!

आदमी एक और नाम अनेक :)

सुन कर काफ़ी अच्छा लगा की भाई साहब के पासपोर्ट की वर्जिनिटी अब ख़त्म हो गई है... लेकिन मियाँ अपना बचा के ही रखना :)

हमें आपके ऊपर पूरा विश्वास है. आप जाके वहां भी rocking performance दीजियेगा और विजयी हो के लौटियेगा !!!

12) ये अंदाजे बयाँ भी कुछ कम नहीं...

हेलो सर जी..

यहाँ का हाल चाल मजे में है.. finally आपका भी गदहा जनम छूट ही गया मतलब देश से बाहर हो ही लिए.. :)

वैसे कहाँ गए हैं .. कोई detail तो भेजिए .. पाकिस्तान या अफगानिस्तान तो नहीं चले गए, जो आपको हमारे देश का कोई नहीं दिखा.. :))
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