मैं और मेरी पंचायत. चाहे ऑफिस हो, या हो घर हम पंचायत होते हर जगह देख सकते हैं. आइये आप भी इस पंचायत में शामिल होइए. जिदगी की यही छोटी-मोटी पंचायतें ही याद रह जाती हैं - वरना इस जिंदगी में और क्या रखा है. "ये फुर्सत एक रुकी हुई ठहरी हुई चीज़ नहीं है, एक हरकत है एक जुम्बिश है - गुलजार"

Saturday, October 11, 2008

लेकिन हर सही आदमी को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए

English: A "taolènnou" or Breton &qu...
English: A "taolènnou" or Breton "mission painting", used by Mikael an Nobletz in his preachings, at Combrit Sainte-Marine church, with the seven capital sins. (Photo credit: Wikipedia)


भगवन ने सब पापी लोगो को बोनस देकर इस कलयुग में भेजा है, ताकि सब पापी लोगो का कल्याण हो जाए. नियम भी बता दिया है - कुछ नहीं करना है - बस भगवन का प्रेम से नाम लेते रहें और वो आपको भवसागर से पार उतार देगा। जितने अपने पाप की सजा जानवर योनी में भोग रहे थे उन सबको चांस मिल गया. इस मौके को पाकर उसका दुरूपयोग होने लगा. सतयुग में एक रावण था और बस उसका परिवार लेकिन बोनस मिलने के बाद आज के हर घर में आप को रावण मिलेगा और वो सब चीज का दुरूपयोग करने लगा है. सभी नई तकनीक का दुरूपयोग. जैसे ले लो अभी कुछ दिन की बात है वैज्ञानिक लोग ब्रह:मांड का पता लगाने की पूरी कोशिश किये, पर सफल नहीं हो पाये। जरा सोचो, क्या वो ऐसा कर सकते हैं? जो अपनी रक्षा नहीं कर सकता है वो भगवन के रचे संसार का पता कैसे लगा सकता है.

जब हम अपने को नहीं जान पाए, हम कौन हैं? हम कहाँ आए हैं? हमारा काम क्या है? यही नासमझी आज हर घर में है। हम जानवर योनी से आ गए हैं. आज हमारा सब काम जानवर जैसा है इसीलिए हम किसी संत को पहचान ही नहीं सकते हैं. 

और न ही संसार में किसी का कोई गुरु होता है. आज के गुरु भी तो वही है जो जानवर गति से आए हैं. जरा सी ताकत मिल गयी भगवन की तो वो उसका दुरूपयोग शुरू कर दिए. बात तो ये है की किसी चीज का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए. जो समझदार बुजुर्ग होते है उनको अपनी चिंता नहीं होती है उनको तो ये लगता है हमने जो किया है उसकी सजा ये है. आगे की जेनरेशन ऐसी है जो आगे बच्चे आने वाले है या इस समय हैं उनका क्या होगा वो बुजुर्ग उनके आने वाले दुःख से दुखी हैं, न की अपने दुःख से.

एक बार की बात है, एक राजा अपनी फूलों की सेज पर सो रहा था. ये सेज बहुत ही सुंदर था. राजा अपनी दासी को सेज देखने को बोल कर चला गया. राजा को आने में देरी हुई तो दासी ने सोचा की हम भी इस सेज पर सो कर देखें कैसा लगता है. इतने में राजा आ गया. रानी को भी बहुत क्रोध आया. अब दासी को सजा सुनाई गई. जितने देर सोई थी उतने १०० कोड़े दासी को मारे जायें. अब दासी को कोड़े मारना शुरू हुआ. दासी का चिल्लाना रोना शुरू हो गया. दासी रोती रही. कुछ देर बाद दासी जोर जोर से हंसने लगी. लोगों को समझ में नहीं आया की मार खाने पर ये हंस क्यों रही है. तब राजा ने दासी से पूछा कि तुम हंस क्यों रही हो. तब दासी ने बोला पहले तो हम अपने कोड़े की चोट से रो रहे थे, पर अब हंस रहे हैं कि हम को कुछ क्षण इस सेज पर सोने की सजा ये है तो राजा तुम तो इसपर कितने समय से सोते रहे हो तुम्हारी सजा क्या होगी. हम इसलिए हंस रहे है।

सबको सजा देने वाला मालिक है और इन्सान के हाथ में कुछ नहीं. सजा तो सबको मिलनी है. वहाँ कोई घूस नहीं चलता है, वहाँ तो बस मोहब्बत ही चलती है वो किसी के पास है ही नहीं . भगवान् ने आपको सुविधा दी हुई है, तो उसका दुरूपयोग नहींकरना चाहिए. हर युग में अच्छे लोग भी होते है लेकिन इस युग में अच्छे लोगो की संख्या बहुत कम है लेकिन हर सही आदमी को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए.

प्रेरणा स्रोत - माँ की शिक्षा जैसी मिली वैसे ही लिख डाली है यहाँ 

2 comments:

  1. आप ये कैसे कह रहे है कि इस युग में अच्छे लोगों की संख्या कम है? रिलेटिव रूप में अच्छे बुरे तो हर कहीं बराबर होते हैं...बैलेन्स इसी तरह से तो बना रहता है.

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  2. पर कहीं न कहीं, ऐसा लगता है कि शायद, ये जो युग है, वो बहुत तेजी से बदल रहा है. इतने स्वार्थी शायद पहले नहीं थे लोग. मन उचाट हो जाता है कभी कभी, शायद इसीलिए लिखा गया ये.

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