मैं और मेरी पंचायत. चाहे ऑफिस हो, या हो घर हम पंचायत होते हर जगह देख सकते हैं. आइये आप भी इस पंचायत में शामिल होइए. जिदगी की यही छोटी-मोटी पंचायतें ही याद रह जाती हैं - वरना इस जिंदगी में और क्या रखा है. "ये फुर्सत एक रुकी हुई ठहरी हुई चीज़ नहीं है, एक हरकत है एक जुम्बिश है - गुलजार"

Sunday, October 12, 2008

मोना के पापा की अनमोल चिट्ठी

LetterImage by Google via Images
"पापा की सीख" से लिया है मैंने ये नीचे लिखा हुआ पत्र. एक एक बात कितनी सच्ची है. मेरा प्रयास है, कि ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़े इसीलिए पुनः पोस्ट किया है इसे. आज के इस आधुनिक युग की आप धापी में, एक बाप का अपनी बेटी के लिए ये अमूल्य संदेश है.

हर बाप का ये सपना होता है, कि वो अपनी बेटी को सही संस्कार दे के ससुराल विदा करे. धन्य है, इस इंटेरनेट युग का कि इसके जरिये समान विचारधाराएँ बह निकली हैं.

सब कहते हैं, कि उनको सब कुछ पता है. पर असल में कितना पता है ये जरूरी नहीं पर ये जरूरी है, कि हम उन शिक्षाओं को कितना अमल कर पाते हैं.

छोटी - छोटी बातें ही धीरे - धीरे बड़ा असर दिखाती हैं.

बहुत ही उत्तम तरीके से कही गई हैं एक - एक बात. हर बात सोलह आने सच. जरूरत है, तो बस इसपे अमल करने की. पिता को साधुवाद और लेखिका को शुक्रिया....

प्रिय मोना,

आज पहली बार तुम्हारे पापा को तुमसे कुछ कहने के लिए कलम का सहारा लेना पड़ रहा है. लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं कि ये सब मैं तुम्हें उस क्षण बता सकूँ जब तुम अपने पापा को छोड़ नए दुनिया मे कदम रख रही होंगी.


  • बिटिया जब आपका विवाह होता हैं तो आप उस पूरे परिवार से जुड़ जाते हो. हमेशा अपने परिवार का मान सम्मान बनाए रखना. मैने और तुम्हारी मम्मी ने हमेशा तुम्हें अपने से बड़े का आदर करना सिखाया है इसे भूलना नही.


  • मै जानता हूँ कि तुम्हें घर के कार्य ठीक से नहीं आते लेकिन धैर्य व लगन से यदि कार्य करने का प्रयास करोंगी तो निश्चित रूप से सभी कार्य कर पाओंगी. तुम्हें कुछ जरूरी बातें बता रहा हूँ जो तुम्हें मदद करेंगी.


  • प्रातः जल्दी उठने की आदत डाले. इससे कार्य करने मे आसानी होती है साथ ही शरीर भी स्वस्थ रहता है.


  • घर के सभी बड़े लोगो को सम्मान दे व कोई भी कार्य करने से पूर्व उनकी अनुमति ले.


  • भोजन मन लगाकर बनाने से उसमें स्वाद आता है कभी भी बेमन या घबराकर भोजन नही बनाओ बल्कि धैर्य से काम लो.


  • यदि तुम्हें कोई कार्य नही आता तो अपने से बड़े से उसके बारे मे जानकारी लो.और उसे करने की कोशिश करो.


  • गुस्सा आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन है. हमेशा ठंडे दिमाग से काम लो. जल्दबाजी मे कोई कार्य न करो.


  • गलतियाँ सभी से होतीं है. कभी भी कोई गलती होने पर तुरंत उसे स्वीकार करो. क्षमा माँगने से कभी परहेज़ न करो.


  • किसी के भी बारे मे कोई भी राय बनाने के पहले स्वयं उसे जाने,परखे तभी कोई राय कायम करे.सुनी हुई बातों पर भरोसा करने के बजाए स्वविवेक से निर्णय ले.


  • सास ससुर की सेवा करें. उन्हें दिल से सम्मान दे. उनकी बातों को नजर अंदाज न करे. न ही उनकी किसी बात को दिल से लगाए.


  • हमेशा अपने पापा के घर से उस घर की तुलना न करो. न ही बखान करो. वहाँ के नियम वहाँ के रिवाज अपनाने का प्रयास करो.


  • किसी भी दोस्त या रिश्तेदार को घर बुलाने के पहले घर के बड़े या पति की आज्ञा ले.


  • विनम्रता धारण करो. संयम से काम लो.कोई भी बिगड़ी बात बनाने का प्रयास करो बिगाड़ने का नही.


  • कोई भी कार्य समय पर पूरा करे. समय का महत्व पहचानो.हर कार्य के लिए निश्चित समय निर्धारित करो व उसे पूर्ण करो.


  • घर के सभी कार्य मे हर सदस्य की मदद करें. जो कार्य न आए उन्हें सीखे.


ऐसी और भी कई छोटी छोटी बातें है जिनका यदी ध्यान रखा जाएँ तो गृहस्थी अच्छी तरह से चलती है. बिटिया अपनी जिम्मेदारियो से मुँह नही फेरना बल्कि उन्हें अच्छी तरह से निभाना. मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. मै जानता हूँ कि तुम अपने ससुराल मे भी अपने मम्मी पापा का नाम ऊँचा रखोंगी व हमे कभी तुम्हारी शिकायत नही आएँगी. तुम सदा खुश रहो और अपनी जिम्मेदारियाँ ठीक से निभाओ यही आशीर्वाद देता हूँ.

तुम्हारा पापा

4 comments:

  1. वाह नीरज जी
    बेटियों की बात बेटियों के लिये बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत की आपने
    आपको बधाई

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  2. आपका लिखा तो अच्छा लग रहा है जी। फीड डाल ली है गूगर रीडर में। देखें, भविष्य में आप कितना चमत्कारिक लिखते हैं।
    इम्प्रेसिव।

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  3. bhai bahut accha laga...papa ka beti ko likha khat.......

    ReplyDelete
  4. यदि हर बाप अपनी बेटी को यही शिक्षा दे और बेटी अमल करे तो हर घर स्वर्ग बन जाएगा . और फेमली कोर्ट बंद हो जाएँगी

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विचारों को पढने और वक्त निकाल के यहाँ कमेन्ट छोड़ने के लिए आपका शुक्रिया

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