मैं और मेरी पंचायत. चाहे ऑफिस हो, या हो घर हम पंचायत होते हर जगह देख सकते हैं. आइये आप भी इस पंचायत में शामिल होइए. जिदगी की यही छोटी-मोटी पंचायतें ही याद रह जाती हैं - वरना इस जिंदगी में और क्या रखा है. "ये फुर्सत एक रुकी हुई ठहरी हुई चीज़ नहीं है, एक हरकत है एक जुम्बिश है - गुलजार"

Thursday, September 25, 2008

जैसी दुनिया वैसे लोग

Mote Log...Image via Wikipedia

पहली बात सेहत की। तो मैं बताऊँ की मैं यहाँ आने के पहले जो समझता था की मोटापा क्या होता है, तो मैं ग़लत था . गज़ब गज़ब के मोटे मोटे आदमी और औरतों को देखा. क्या सेहत है भगवान् की दुआ से. भगवान् बनाए रखें. मैं तो पहले उन लोगों से सवाल करना चाहता हूँ, जिन्होंने मेरे को मोटा कहा है. भाई मैं तो उतना मोटा हो ही नहीं सकता. मस्ती में झूमते हुए चलते हैं. वाह मालिक तेरी बसाई दुनिया भी क्या गज़ब है :)


दूसरी बात मैंने देखा है उन लोगों को, जो की सिर्फ़ काम करते हैं. मेरा मतलब मजदूरों से नहीं है, बल्कि उन लोगों से है जो की हम लोगों की तरह ही technical काम करते हैं. तो इन टेक्नीकल लोगो के चेहरे को देख कर एक ख्याल आता है. चिरकुट ख्याल. इन सारे लोगों का चेहरा जब भी मैं देखता हूँ तो मुझको क्या लगता है - लीजिये सुनिए. हम लोग जो technical किताबें पढ़ते हैं , अक्सर उनके पीछे उसके लेखक की फोटो छपी रहती है. एकदम उन लोगों के ही भाई बहन लगते हैं ये लोग. और ये लोग बातें कैसे करते हैं? एक बात, की जब ये लोग बातें शुरू करेंगे तो एकदम उसी में डूब के बातें करते हैं. एकदम core technical बातें ... ह्म्म्म्मं.. बिना दायें बाएँ सोचे. काफी नया experience है. हम लोग काफी दुनियादारी का ख्याल रखते हुए ही टेक्नीकल बातें भी करते हैं. Culture है क्या करें?

तीसरी बात मैंने जो notice की है वो ये है, की सबको अपने बॉस से उतना ही डर लगता है, चाहे वो कोई जगह हो. लोगों से जानकारी लेने के लिए उसी तरह से चिरौरी करनी पड़ती है. लोगों को गुस्सा भी एक तरह से ही आता है. कुछ लोग बहुत सेंसिटिव होते हैं तो कुछ लोग एकदम घांघ. हर जगह कुछ लोग बहुत helpful होते हैं तो कुछ लोग अहम् का दूसरा रूप.

वैसे चौथी और सबसे अजीब बात ये है की मैं एक ऐसी जगह हूँ जहाँ कि सिर्फ़ मैं ही हूँ जो कि coding नहीं कर रहा हूँ.. वरना नजर उठा के देखता हूँ तो काफी उमर-दराज लोगों कि एक लम्बी फेहरिस्त है, और सभी कंप्यूटर खोल के कोडिंग कर रहे हैं. अजीब बात लगती है. अभी मेरा जो काम है, और मैं जिस काम से यहाँ हूँ, वो थोड़ा अलग है, वो बात तो समझ में आती है. पर फिर भी एक इंसान का जो basic चरित्र होता है वो इतना जल्दी तो नहीं न बदल सकता. अब इसमें किसका दोष है कि मैं जहाँ हूँ, वो जगह पूरी तरह से technical लोगों से भरी हुई है. सभी लोग उसी तरह कोडिंग का काम कर रहे हैं, जैसा की हम लोग करते हैं. तो मैं अक्सर confuse हो जाता हूँ. पर एक अन्तर है, वो ये है, की इन सारे लोगों की उमर काफी ज्यादा है. अपने यहाँ इस उमर में लोग ज्यादातर कोडिंग का काम नहीं करते हैं या ये कहो कि इज्ज़त कि बात हो जाती है. अगर पसंद हो तो system बहुत उमर हो जाने पे दूसरा काम दे देता है. आप चाह के भी या ये कहिये कि चाहत develop हो ही नहीं पाती है. पर यहीं तो यहाँ की अच्छी बात है , की जिसको जो पसंद है वो उस काम को करने के लिए आजाद है.ये तो रही कुछ ज्ञान की बातें :) जैसी दुनिया वैसे लोग


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