मैं और मेरी पंचायत. चाहे ऑफिस हो, या हो घर हम पंचायत होते हर जगह देख सकते हैं. आइये आप भी इस पंचायत में शामिल होइए. जिदगी की यही छोटी-मोटी पंचायतें ही याद रह जाती हैं - वरना इस जिंदगी में और क्या रखा है. "ये फुर्सत एक रुकी हुई ठहरी हुई चीज़ नहीं है, एक हरकत है एक जुम्बिश है - गुलजार"

Friday, December 12, 2008

अगर आप अपने को अप-टू-डेट नहीं रखेंगे तो आपकी भी दिवाली, ईद और क्रिसमस खट्टा हो सकता है

Newsweek 2008 06 16
Newsweek 2008 06 16 (Photo credit: sdobie)


आज यहाँ माहौल थोड़ा अलग है. सुबह से ही थोड़ा सूनापन महसूस हो रहा था, पर असलियत तब पता चली जब हमारे क्लाइंट ने हमें एक कमरे में ले जा के गुफ्तगू की. श्रीमान ने बताया कि, १२% लोग कंपनी से निकाल दिए गए हैं. मैं इस कंपनी के जिस ग्रुप के लिए एक कंसलटैंट की हैसियत से यहाँ काम कर रहा हूँ, उसके करीब १०० में से २५ लोग नप गए.

मैंने जब से काम शुरू किया है, तब से लगभग सब कुछ ठीक ही था. पर अभी विगत कुछ दिनों से जिस प्रकार से इकोनोमी ख़राब हुई है, उसका असर इतने करीब से पहली बार देख रहा हूँ. इतनी चका-चौंध है इस देश में हर तरफ़. अपने देश से देखो तो लगता है कि बस सपनों की नगरी है. अभी मैं जब ये लिख रहा हूँ, तो बस समझ में नहीं आता कि अपनी भावनाओं को किस प्रकार से काबू में करूं. जिनको निकाला गया, वो मेरे कोई नहीं थे, पर मन तो नहीं न मानता है. अभी क्रिसमस का टाइम है, लोग उत्सव के माहौल में हैं. और आज जब वो सुबह ऑफिस आते हैं, तो उनको बता दिया जाता है, कि बस अब कंपनी को आपकी सेवा की जरूरत नहीं है.

मैं तो बस चंद दिन और हूँ यहाँ पर. कल जब देश में लौट जाऊँगा तो फिर से रोज-मर्रा की जरूरतों और समस्याओं में उलझ जाऊँगा. फिर शायद इतना सोच न पाऊँ. पर अभी जो दिल में है, लिख दे रहा हूँ. दोस्तों, बाहर से देखने में वो जो दीखता है, वो हमेशा ही उतना उजला नहीं होता है. यहाँ भी, इस देश में भी लोगों को कष्ट और दुःख उसी तरह होता है. मन थोड़ा इसलिए भी मेरा कुछ ज्यादा खट्टा हो गया, क्योंकि जिन लोगों की नौकरी गई है, उनमें से एक मेरे सीट के बगल वाली सीट पे बैठने वाले भी थे.. अभी पिछले ३ वीक से मैं प्रोजेक्ट के काम से उनसे टच में था. वो थोड़ा उमर दराज थे, और प्रोग्रम्मिंग का काम करते थे. हमेशा मुस्कुराते रहते थे. अभी जब उनकी सीट पे देख रहा हूँ, तो बड़ा अजीब लग रहा है.

बहुत जरूरी है, कि आप अपना काम बहुत ही मन लगा के करें. देश और दुनिया की पंचायत जरूरी है, पर अगर आप अपने को अप-टू-डेट नहीं रखेंगे तो आपकी भी दिवाली, ईद और क्रिसमस खट्टा हो सकता है. दोस्तों, ये चंद लाइनें मैंने लिखीं हैं, इसके पीछे मेरा एक ख़ास मकसद है. आप सभी लोगों से निवेदन है, कि दुनिया की, अपने देश की समस्याओं और बाकी दिक्कतों पे ज्यादा ध्यान दे के अपना वक्त न बरबाद करें. आतंकवादी, नेता, क्रिकेट, फूटबाल, सिनेमा और नाच गाना की चर्चा कर के अपना वक्त जाया न करें. न तो इनके बारे में पढ़ें और न ही चिंतित हो और न ही चर्चा करें. अगर चिंता करनी ही है तो अपने करियर और व्यावसाय को ले के चिंतन करें. वरना एक दिन हमारा भी आ सकता है.

8 comments:

  1. यह समस्या हमारे देश में भी आ गई है और कभी भी किसी की भी नौकरी निगल सकती है । आपका कल तक का काम नहीं देखा जाएगा, बस यही देखा जाएगा कि क्या आज आपके बिना आपके संस्थान का काम चल सकता है या नहीं ।
    घुघूती बासूती

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  2. मेरे ख्याल में चर्चा और चिन्तन न करने की बजाय अपने आपको अप टू डेट रखने और इन चर्चाओं के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है-अगर इन सब बातों पर चर्चायें और चिन्तन ही बंद हो जाये तो क्या होगा-उसे चित्रित करने की कोशिश किजिये.

    कैरीयर से सब कुछ है मगर सब कुछ कैरीयर ही तो नहीं!!!

    इस मंदी के दौर में थोड़ा ज्यादा कान्शियसनेस और कन्शनट्रेशन चाहिये, बस्स!!

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  3. Maine kayi baar tippanee deneki koshish kee par connection drop hota raha... kahir, meree shrinkhala,"Ek ....Duvidhape", tippaneeke liye shukraguzaar hun...aur maafee chahti hun, ki is kadeeka baad mai "kramashaha" likhna bhool gayi....aur ye sahi kathan hai...kisee khaas maqsadko saamne rakh kar rahi hun....kahanika kathanak kayi baar "flashbackme" chalta hai...pathak anek sawal poochhte gaye aur shrinkhala badhati gayi...ek aakar letee gayi...nayikaaki, "jo mai swayam hun), pareshaniyonka karan, gar aap pichhali kuchh kadiyan padhen to samajh aa sakta hai...par ye to aapke samay milnepe nirbhar hai..
    Ek baat kehna chahti hun...haliya hue aatankwaadi hamleke baad maine"Meree Aawaaz Suno" tatha "Ye jazba salamat Rahe" ye do lekh aur teen kavitaye apne blogpe likhi hain..."Jateeywaad, Aatankwaad Aur Suraksha yantrana", in muddonko leke awwal to janjagruti abhiyaan haathme liya hai, saath hee ek abhyaspoorn lekin jhakjhor denewaali documentary banane jaa rahi hun...kayi qanooni sachhayiyonse jantako rubaru karana chahti hun...gar in sachhayiyonko saamne rakh janta sarkaarse jawabdehi maange to use koyi nahi rok sakta balki jeet tay hai....pichhale 28 saalonse nidrist sarkaaren hadbadaake jaag sakti hain...zaroori hai janta zimmedaar loktantraka ek bhag banke apna haq maange aur zimmedareebhi nibhaye, warna ye aandhi...ye bagoole hame nigalneme zyada samay nahi lenge...agla nishana hambhi ho sakte hain...adhikse adhik sahkaary ki maang hai...guhaar hai, ek sachhe Hindustaaneeki pukar hai....aao hambhi haath uthayen...milke...

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  4. कहते है जो देश की चिंता करता है वो दुबला हो जाता है .ओर दुबले आदमी फिट रहते है .......नही ???

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  5. आप सही कहते हैं - अपने कैरियर की चिन्ता करना वाजिब है।

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  6. सही कहा है आपने - जो व्यक्ति अपने बारे में चिंतन नहीं कर सकता है, अपने लिए ख़ुद जिम्मेदार नहीं बन सकता .. उसका चिंतन देश के लिए या किसी और चीज़ के लिए कितना लायक होगा?

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  7. समस्यायें हर जगह हैं। उनसे निपटने के लिये तैयारी करते रहना चाहिये। नौकरी जाने वालों के लिये आपकी संवेदना काबिले तारीफ़ है।

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  8. नीरज जी बिल्कुल सही कहा आपने और हमारे देश में भी अब उसका असर दिखाई दे रहा हैं आपके दर्द को समझ सकती हूँ कारण मेरे पति भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और हमेशा एक डर की तलवार लटकती रहती हैं. आपने अप टू डेट रहने की बात कही उस पर अमल किया जाना चाहिए. धन्यवाद. मोनिका

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विचारों को पढने और वक्त निकाल के यहाँ कमेन्ट छोड़ने के लिए आपका शुक्रिया

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